Deen Dayal Upadhyay Gorakhpur University

कला संकाय
(FACULTY OF ARTS)

उत्‍तर प्रदेश राज्‍य विश्‍वविद्यालय अधिनियम के अन्‍तर्गत 1956 ई0 में स्‍थापित गोरखपुर विश्‍वविद्यालय में कला संकाय को प्रथम संकाय होने का गौरव प्राप्‍त है। इसके प्रथम सत्र में     अंग्रेजी, शिक्षाशास्‍त्र, मनोविज्ञान, संस्‍क़त एवं पुरातत्‍व विभाग में कक्षायें प्रारम्‍भ हुई। स्‍थापना से लेकर आजतक 50 वर्षो में संकाय ने उत्‍तरोत्‍तर विकास किया है। सम्‍प्रति इस संकाय में 13 विभाग हैं तथा इसके अन्‍तर्गत विश्‍वविद्यालय के सर्वाधिक छात्र अध्‍ययन हेतु अलग-अलग व्‍यवस्‍था है। छात्राओं की दीक्षा भवन में तथा छात्रों की कक्षायें कला संकाय भवन में चलती हैं। विद्यार्थियों को भारत के गौरवशाली अतीत से परिचित कराने के उद्देश्‍य से राष्‍टगौरव पाठ्रयक्रम वर्ष 2002 से प्रारम्‍भ किया गया है। स्‍नातक प्रथम वर्ष के छात्र-छात्राओं के लिये इसकी कक्षायें प्रारम्‍भ कर कला संकाय इस क्षेत्र में प्रवर्तन भूमिका में आ गया और विश्‍वविद्यालय प्रदेश का राष्‍ट्रगौरव पाठयक्रम लागू करने वाला प्रथम विश्‍वविद्यालय बन गया।
भविष्‍य के लिये संकाय की योजनायें
अपने गौरवशाली अतीत को बनाये रखने तथा समय एवं अभिनव परिस्थितियों और चुनौतियों के अनुकूल अपने स्‍तर को बनाये रखने के लिये कला संकाय की निम्‍न भावी योजनायें हैं
1- उच्‍च शैक्षणिक वातावरण बनाने तथा विभिन्‍न विषयों की वर्तमान स्थिति तथा भावी प्रव़त्ति के ज्ञान हेतु प्रत्‍येक माह एक उच्‍चस्‍तरीय व्‍याख्‍यान कराना।

2- संकाय द्वारा अन्‍तरविषयक शोध पत्रिका के प्रकाशन की योजना है।
3- समसामयिक विषयों के बारे में शिक्षक एवं छात्रों के मध्‍य स्‍पष्‍टता हेतु तथा उनके मौलिक विचारों को दूसरे के समक्ष संप्रेक्षित होने के लिये तथा क्षेत्रीय, राष्‍ट्रीय एवं अन्‍तर्राष्‍ट्रीय घटनाओं एवं समस्‍याओं पर संगोष्ठियों के आयोजन की योजना है। इससे जहॉ एक ओर शिक्षकों के बौद्विक स्‍तर में अभिव़द्वि? होगी, वहीं दूसरी ओर अपने विचार को प्रभावी ढगं से प्रस्‍तुत करने की सिद्वता भी आयेगी। इन संगोष्ठियों से छात्र-छात्राओं में समाज के प्रति सकारात्‍मक एवं रचनात्‍मक प्रव़त्ति का निर्माण होगा।
4-भारतीय मान्‍यताओं, संस्‍कारों, राष्‍ट्रीय गौरव और स्‍थानीय कलाओं के प्रति जागय्‍कता पैदा करने तथा छात्र-छात्राओं में अन्‍तर्निहित सांस्‍क़तिक क्षमता के प्रस्‍ुटन हेतु उपयुक्‍त वातावरण प्रदान करने हेतु समय-समय पर सांस्‍क़तिक कार्यक्रम का आयोजन किया जायेगा, जिसमें छात्र-छात्रायें भाग लेकर अपनी सांस्‍क़तिक विरासत से परिचित हो सकेगें।
5- वर्तमान सामाजिक एवं आर्थिक चुनौतियों के प्रति संकाय संवेदनशील है। इसका यक प्रयास होगा कि इन चुनौतियों को द़ष्टिगत कर पारस्‍परिक पाठ्रयक्रमों के साथ-साथ कुछ रोजगार एवं व्‍यवसायपरक पाठ्रयक्रम भी चलाया जायें।